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All around the world, thousands of markets have millions of tents, and an Arabic tent still lists at the top position and astonishing part of Arabic tents.

Taaza Tadka

क्यों भाई, मैं शाहरुख़ खान और सचिन तेंदुलकर क्यों बनूं ? दुर्गा प्रसाद क्यों नहीं ?

अक्सर लोग यही पर चूक जाते हैं, और जिंदगी भर भगवान को या दुनिया को कोसते रहते हैं, लेकिन कभी अपने आप को नहीं कोसते। लोग सलमान बनना चाहते

आजकल की दुनिया बड़ी फास्ट हो गई हैं।इतना तेज जितना हम लोग सोच भी नहीं सकते हैं।हर किसी को अपनी मंजिल चाहिये।किसी को मिलता हैं और किसी को नही भी मिलता हैं, फलस्वरूप कई लोग अपनी जिंदगी तक खत्म कर लेते हैं।हर किसी को जल्दी है, ना जाने किस चीज की जल्दी।

और इस जल्दी में लोग अपनी अमूल्य जीवन को नष्ट कर रहे हैं।मजे की बात यह है कि बहुतों को तो अपनी लाइफ का उद्देश्य तक नही पता है, बस दौड़ रहे हैं इस भीड़ में बिना यह जाने की उन्हें आखिर पाना क्या है।जिंदगी इतनी बुरी भी नही है, जितना हमने इसे बना दिया है।हम सिर्फ इस वजह से कि हमारे पास क्या नही है, जो हमारे पास है उसका आनंद नहीं उठा पाते हैं।

यह कितनी बड़ी विडंबना है कि हम इसलिये उतना दुखी नहीं होते हैं कि कोई चीज हमारे पास नहीं है जितना यह जानकर वह चीज किसी दूसरे के पास है।मतलब है यह है कि हम अपने से ज्यादा दूसरो से ज्यादा दुखी रहते है।लगभग हर भारतीय का यही हाल है,नही तो कब के हमलोग भी अमेरिका और चीन बन जाते।

इस चीज का कोई अंत भी नही है।जरूरत हैं कि हम अपने कल के लिये अपने आज को न बर्बाद करें। आप अपने आज को कल को बनाने के लिये नहीं जी पा रहे है, जबकि आपको पता है कि कल कभी नहीं आता और क्या पता कल हो ना हो।

मेरा यह कतई मतलब नहीं है कि आप कल की चिंता ना करे, पर इतना भी चिंता ना करे कि कल आप ही ना हों।कभी भी अपने आप को किसी से तुलना ना करे, क्योंकि हर व्यक्ति अपने आप मे खास होता हैं।ना किसी से घृणा करे ना ख़ुद से।

अपने आप से प्यार कीजिये और हर दिन, हर पल, हर सेकेंड को एन्जॉय कीजिये।यही जिंदगी है, आप दूसरों की नकल तो कीजिये लेकिन कभी उनके जैसा बनने की कोशिश नहीं कीजिये, क्योंकि तब आप की खुद की पहचान कहा रह जायेगी। अक्सर लोग यही पर चूक जाते है, और जिंदगी भर भगवान को या दुनिया को कोसते रहते है, लेकिन कभी अपने आप को नही कोसते।

लोग सलमान बनना चाहते है, सचिन बनना चाहते है, रहमान बनना चाहते है, लेकिन कभी खुद से नही पुछ पाते कि वो वास्तव में क्या बनना चाहते है। सिर्फ सेलेब्रिटीज़ की जिंदगी, रहन सहन और दिखावा देखकर कितने वो नही बन पाते, जो शायद बन जाते तो आज समाज मे एक अलग पहचान बना पाते।कुछ तो इस चक्कर मे कुछ भी नही बन पाते और अपने को नाकारा मानकर सुसाइड तक कर लेते हैं।

किसी की तरह हम बने, इससे अच्छा यह है कि हम कुछ ऐसा करे कि लोग हमारे जैसा बने और यह तब संभव जब हम अपनी अलग पहचान बनाएंगे।

आप जो भी कर सकते हो, उसी में अलग करो। तभी आप औरो से अलग दिखोगे। फॉलो सबको कीजिये लेकिन बनिये वही जो आपका दिल कहे ना कि आपका दिमाग।

एक बच्चा नया जूता पाकर खुश होता हैं, तो एक बच्चा पुराना जूता पाकर भी उतना ही खुश होता हैं।समझने की बात यह है कि मैं शाहरुख बनकर ही क्यों खुश हूँगा, दुर्गा प्रसाद बनकर क्यो नही।

कहने का मतलब यह कि यह सब आपके सोच पर डिपेंड करता है कि आप किस चीज को किस तरह से ले पाते है।मत भूलिये की भगवान ने हर किसी को अलग बनाया है और सबके अंदर छमता दी है।यह आप पर निर्भर करता है कि आप जिंदगी जीने पर विस्वास करते है कि उसे कोसने में।