आदरणीय केंद्र सरकार, सिर्फ आम आदमी पार्टी को लेके आपकी अति पारदर्शिता आपका डर है या दोगलापन ?

आखिर क्यों केंद्र सरकार को 2000 करोड़ के कांग्रेस के विज्ञापन से नहीं बल्कि आम आदमी पार्टी के 97 करोड़ के NRI फंडिंग से डर है ?
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केंद्र सरकार यानी भारत जैसे देश का सर्वे सर्वा |

जी हाँ , यदि आपकी पार्टी केंद्र में है तो आप जो चाहे वो कर सकते हैं , चाहे तो गणेश भगवान् की मूर्ति को दूध पीला दीजिये या दैनिक जागरण जैसे बड़े न्यूज़ पेपर में फ्रंट पेज पर झूठी सर्जिकल स्ट्राइक की तस्वीर दिखा दीजिये | चाहे ज़ी न्यूज़ द्वारा, फेक लेबल लगा कर “पूंजीवाद से आज़ादी ” जैसे नारे को “पाकिस्तान जिंदाबाद” कहके दिखा दीजिये , या चाहे तो सोशल मीडिया पर किसी की भी माँ बहन अपने लिखित शब्दों से कर दीजिये |

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दैनिक जागरण द्वारा पहले पेज पर पब्लिश किया गया झूठा न्यूज़

खुद 7000 करोड़ रुपया चुनाव में खर्च कीजिये आपसे कोई कुछ नहीं पूछेगा , लेकिन आपको हक़ है कि आप किसी और पार्टी के २ लाख के डोनेशन का भी पोस्टमार्टम कर के रख दें |

कोई आपसे नहीं पूछेगा कि यूपी को गुंडाराज से बचाने की बात करने वाली आपकी पार्टी के मुख्य लीडर खुद ना जाने कितने ही अपराधों और हत्या के आरोपों से घिरे हैं | जी हाँ , यूपी के बदायूं में होने वाली नाबालिक लड़की के बलात्कार के बाद की हत्या पर घड़ियाली आंसू बहाने वालों और उस समय की सरकार पर विशेष तंज कसने वालों पर आज कोई उंगली उठा कर ये नहीं पूछ सकता है कि, आखिर इनकी खुद कि सरकार बनने के 25 दिन के अंदर ही इलाहाबाद में एक नाबालिक का 5 लोगों द्वारा बलात्कार करके उसको मार दिया जाता है इसमें किसकी गलती है ? मौजूदा सरकार या पिछली सरकार की ?

‘कहत कबीर सुनो भाई साधो’

ऐसा मैं कहने चलूंगी तो सोशल मीडिया पर आपके भक्तों द्वारा मेरा शाब्दिक बलात्कार होना तय है , फिर भी थोड़ी हिम्मत करने की कोशिश कर रही हूँ |

जिस केंद्र सरकार ने विधानसभा चुनाव 2017 के दौरान खुद न्यूज़ पेपर के पहले 2 पन्नों को 4 महीने तक खरीद कर आम जनता के खून पसीने की कमाई के एक हिस्से और कर का 300 करोड़ सिर्फ पेपर के विज्ञापन पर खर्च कर दिया था आज वो जागरूक जनता कहाँ है जो केजरीवाल के 97 करोड़ के चुनावी खर्च को देश के लोगों का कर बता रही है ? कहाँ है वो चुनाव आयोग जो कहता है, वो पूरी तरह पारदर्शी है | क्या इस देश में चुनाव आयोग के हिसाब से सिर्फ एक ही पार्टी है जिसने विधानसभा चुनाव लड़ा ?

हाँ मैं उस देश में हूँ जहाँ लोकतंत्र की एक बड़ी ही अच्छी सी परिभाषा हमारे संविधान में दी गयी है | पिछली केंद्र सरकार द्वारा RTI एक्ट लाने के साथ साथ ही, हमको कुछ एक और अधिकार पाने की उम्मीद जरूर थी लेकिन हम ये अधिकार सिर्फ और सिर्फ आम आदमी पार्टी की जानकारी पाने के लिए नहीं बल्कि भारत देश में जितनी भी राजनितिक पार्टियां हैं उन सबकी जानकारी के लिए उपयोग करना चाहते थे |

हमारे देश के प्रधानसेवक यानी कि प्रधानमन्त्री श्री नरेंद्र मोदी जी , आपको आखिर क्या जरुरत पड़ जाती है कि आप वस्तुतः ये भूल जाना ही उचित समझते हैं कि आप इस देश के प्रधानमन्त्री हैं ना कि किसी पार्टी या संगठन के नेता |

जो केंद्र सरकार खुद अपनी पार्टी की फंडिंग को RTI एक्ट में नहीं ला रही है और हक़ से बहरी और गूंगी जनता को ये समझा दे रही है कि पार्टी की गोपनीयता भंग होंगी | किन्तु उस जनता को ये बताया जाएगा कि इनको 11 अरब आखिर चुनाव में खर्च करने को किसने दिया ? जो केंद्र सरकार 97 करोड़ के आम आदमी पार्टी के खर्चे को आम आदमी पार्टी से वसूल करने की बात कर रही है ?

आज से पहले मुझे दोगलापन का सिर्फ एक ही मतलब समझ में आया था लेकिन मौजूदा सरकार की स्थिति देख कर मजबूरन इस सरकार को मुझे इस शब्द की उपाधि देने की इच्छा हो रही है |

नहीं नहीं नाराज मत होना , क्या है ना ऐसे बोल बचन और मृदुभाषा बोलने का अधिकार भी हमे इसी सरकार ने दिया है न विश्वास हो तो कभी उनलोगों की बोली, शब्द और भाषा का उदाहरण तुम भी देख लो ना जिनको हमारे प्रधानमन्त्री जी ट्विटर पर फॉलो करते हैं|

मैं ना कहती कि, तुम आम आदमी पार्टी पर केस मत करो | यदि उन्होंने भ्रष्टाचार किया तो उनके नेताओं को पकड़ कर जेल में डालो , लेकिन रजिंदर कुमार के १४ लाख के बैंक स्टेटमेंट पर बवाल करके दिल्ली सरकार के ऑफिस को सील करने वाली केंद्र सरकार आखिर व्यापम , चावल , ललित गेट जैसे घोटाले करने वालों के दफ्तर को कब बंद करने वाली है ?

हाँ मैं जानना चाहती हूँ इस दोमुहे केंद्र सरकार से कि आजतक इस देश में आम आदमी पार्टी के अलावा भी किसी ने चुनाव लड़ा है या नहीं ?

यदि लड़ा है उनके खर्चे का ब्यौरा कब मांगा जाएगा चुनाव आयोग द्वारा और आखिर कब केंद्र सरकार जनता के कर को वापस करने की मांग उस पार्टी से करेगी ?

मैं भारत देश में रहती हूँ , और इस नाते हाँ मैं ये जानती हूँ कि यहाँ पर बनने वाली हर राष्ट्रीय पार्टी चाहे वो कांग्रेस हो या भाजपा सभी भ्रष्टाचार से लिप्त हैं , लेकिन फिर भी आज तक ऐसी दोगली विचारधारा किसी सत्ताधारी की नहीं हुई, जितनी मौजूदा केंद्र सरकार की है |

आखिर क्यों ऐसा होता है कि योगी आदित्यनाथ द्वारा दिव्यांग पेंशन 500 किये जाने की बात हर मीडिया वाले चलाते हैं किन्तु अरविन्द केजरीवाल द्वारा दिव्यांग पेंशन 2000 करने की बात खुद सभी दिल्ली वालों को भी नहीं पता ? क्या मीडिया और केंद्र सरकार आम आदमी पार्टी जैसी छोटी सी पार्टी से डरती है ?

यदि आपलोग इतने सच्चे हो तो क्यों नहीं पारित कर देते लोकपाल बिल ? क्यों नहीं दे देते दिल्ली को विशेष राज्य का दर्ज़ा? क्यों नहीं लौटा देते दिल्ली सरकार को एंटी करप्शन ब्रांच ? नहीं है जवाब न ?

तो कड़वा सच सुनो

जिस दिन लोकपाल बिल आ जाएगा उस दिन लोकपाल के विधेयक के अनुसार सबसे पहले मौज़ूदा सरकार पर गाज गिरेगी , क्योंकि इस लोकपाल के अनुसार सबसे पहले देश के सभी संसद की नेहगेह होगी | तो आखिर केंद्र सरकार क्यों पारित होने देगी इस बिल को ? बेशक डरती है केंद्र सरकार |

56 हज़ार करोड़ का व्यापम घोटाला करने के बाद भी 2 लाख के चंदे पर पार्लियामेंट में बहस करने वाली केंद्र सरकार आखिर आम आदमी पार्टी को और कितना पारदर्शी बनाना चाहती है ?

आखिर क्यों केंद्र सरकार को 2000 करोड़ के कांग्रेस के विज्ञापन से नहीं बल्कि आम आदमी पार्टी के 97 करोड़ के NRI फंडिंग से डर है ?

आखिर किस डर के कारण एंटी करप्शन ब्रांच को दिल्ली सरकार से छीन लिया गया ? यदि छिना गया तो हर दो दिन पर आम आदमी पार्टी का दफ्तर बंद करने वाली केंद्र सरकार का शीला दीक्षित जैसी भ्रष्टाचारी पर कार्यवाही क्यों नहीं ? क्या सिर्फ आम आदमी पार्टी से ही डरती है केंद्र सरकार ?

हाँ हो सकता है ये डर ना हो , बेशक डर होता तो खुद नरेंद्र मोदी के ऑफिसियल ट्विटर से फेक न्यूज़ को बार बार रीट्वीट करने की हिमाकत नहीं किया जाता | बेशक डर नहीं है |

लेकिन यदि डर नहीं तो इसी को दोगलापन कहते हैं , हाँ आज की भारतीय राजनीती दोगलेपन की एक अनुपम मिसाल है|

जय हिन्द , जय भारत

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